ऐसे कैसे रुकेगा कोख में बेटियों का कत्ल

देहरादून। कोख में बेटियों का कत्ल करने वालों की प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग निशानदेही नहीं कर पाया है। जब भी कन्या भ्रूण हत्या का मामला उठता है कुछ पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ही छापेमारी और जांच करके विभागीय अधिकारी वाहवाही लूट लेते हैं। लेकिन असल हत्यारे नोटिस में ही नहीं आ पाते।
स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के सरकारी और निजी क्षेत्र के बड़े अस्पतालों और दूसरे अल्ट्रासाउंड सेंटरों की सूची तैयार की है। ट्रैकर लगाने से लेकर सारी जांच-पड़ताल इन्हीं अल्ट्रासाउंड सेंटरों की होती है। लेकिन गली-कूंचों में चल रहे दो कमरे के नर्सिंगहोमों और झोलाछाप डाक्टरों के अल्ट्रासाउंड सेंटरों का ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। जबकि भ्रूण के लिंग की पहचान और भ्रूण हत्या का अधिकतर काम इन्हीं स्थानों पर होता है। इस बात को दबी जुबान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मानते हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में यह धंधा होता नहीं है। बड़े डिग्री वाले डाक्टर कुछ पैसों के लिए यह काम करेंगे नहीं। लेकिन कुछ लोग हैं जो अल्ट्रासाउंड सेंटर केवल इसी काम के लिए खोल रखा है। लेकिन इनके खिलाफ कभी कार्रवाई होती नहीं है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि चूंकि इनके खिलाफ शिकायत नहीं आती। इसलिए कार्रवाई से बच जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास झोलाछाप डाक्टरों की सूची भले नहीं है लेकिन अधिकारी मानते हैं कि हजार-डेढ़ हजार झोलाछाप डाक्टर होंगे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि झोलाछाप डाक्टरों के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर टेक्नीशियन काम करते हैं। शुरू में यह किसी रेडियोलोजिस्ट के यहां काम करते हैं। थोड़ा-बहुत सीखकर धंधा शुरू कर देते हैं। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ बीएस जंगपांगी कहते हैं कि जब भी शिकायत मिलती है, वे अल्ट्रासाउंड सेंटर को सीज कर देते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसी कोई एजेंसी नहीं है जो झोलाछाप डाक्टरों के अल्ट्रासाउंड सेंटर का पता लगाए। जिले में झोलाछाप डाक्टर हैं। हर ब्लाक में सर्वे कराया गया है। रिपोर्ट संकलित की जा रही है।
-डॉ आरपी भट्ट, मुख्य चिकित्साधिकारी
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विभागों में तालमेल की दिक्कत
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस में तालमेल नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ प्रभावी और नियमित अभियान नहीं चल पाता है। अधिकारियों का कहना है कि तीनों विभाग एक साथ जुट नहीं पाते हैं। जब सारे लोग इकट्ठे होते हैं तो अभियान चलता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ आरपी भट्ट का कहना है कि जब भी अभियान चलेगा जिलाधिकारी के निर्देशन में ही चलेगा। इसमें मजिस्ट्रेट और पुलिस भी मौजूद रहेगी।

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